प्लस टू अतिथि शिक्षकों से भी हटाया जाए अतिथि शब्द,मिले एक समान सम्मान : iRajanBhardwaj
शिक्षकों को विभिन्न प्रकार से सम्मान देने की बात सनातन समय से ही होता आया हैं, शिक्षकों को पूजनीय माना जाता हैं, उन्हें सम्मानित किया जाता हैं।इसी परंपरा का निर्वाह आज भी 15 अगस्त 26 जनवरी एवं 5 सितंबर के दिन विभिन्न प्रकार से प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया जाता है। इस बार भी बहुत सारे शिक्षकों को 15 अगस्त के दिन माननीय मुख्यमंत्री बिहार सरकार श्री नीतीश कुमार महोदय,छात्र छात्राओं को पढ़ाने और राजकीय संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने में अपना अहम योगदान देने वाले शिक्षकों को हर साल की तरह इस बार भी सम्मानित करेंगे, प्रशस्ति पत्र देंगे, एवं समाज में बदलाव हेतु एक नया अध्याय लिखेंगे।
विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से एवं टीवी चैनलों के माध्यम से यह ज्ञात हो रहा है की इस बार श्री नीतीश कुमार महोदय एक नया अध्याय लिखेंगे 15 वर्षों के अपने शासनकाल में नियुक्त किए गए नियोजित शिक्षकों से उनका नियोजित शब्द हटाकर उन्हें विभिन्न प्रकार के सुविधाओं सहित सम्मान देंगे। साथ ही सेवा शर्त,ट्रांसफर पोस्टिंग, वेतन वृद्धि, अनुकंपा एवं विभिन्न प्रकार के सुविधाएं जो पूर्व में शिक्षकों को दिया जाता था, वह नियोजित शिक्षकों को मिलेगा। जिससे लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षक लाभान्वित होंगे।यह सम्मान का दिन है ,आज सभी नियोजित शिक्षक बहुत खुश हैं के उनके नाम से अब नियोजित शब्द हट जाएगा, खबर तो यह भी है कि अब बिहार में उपनाम वाले शिक्षक नहीं रहेंगे।
नियोजित शिक्षकों से नियोजित शब्द हटाकर जिस तरह से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार उन्हें विशेष सम्मान दे रहे हैं यह अकल्पनीय है,सच कहे तो यह एक ऐतिहासिक बदलाव का दिन है।पौने चार लाख शिक्षकों को यह सम्मान मिलना गर्व की बात है।वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय , उत्क्रमित मध्य विद्यालय , उच्च माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक एवं नियोजित शिक्षक कार्यरत है। उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में अतिथि एवं नियोजित शिक्षक कार्यरत हैं।अब जब नियोजित शिक्षक से नियोजित शब्द हटा लिया जाएगा तो यह सोचनीय प्रश्न है कि मात्र 4203 अतिथि शिक्षकों को यह सम्मान ना मिले।इन्हें भी यह सम्मान मिलना चाहिए, इनसे भी अतिथि शब्द हटे, इन्हें भी विभिन्न प्रकार के लाभ मिले। नाम मात्र की यह संख्या को भी अगर यह लाभ मिले तो इतनी बड़ी संख्या(पौने चार लाख)में कोई अंतर नहीं आने वाली है। पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों में अगर 4203 अतिथि शिक्षकों को जोड़ लिया जाए तो कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ने वाला यह एक नाम मात्र की संख्या है जो अपने सम्मान के लिए विभिन्न प्रकार से नियमितीकरण की बात करते रहें हैं।
अतिथि शिक्षक राजन भारद्वाज बताते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा विभाग के आदेश द्वारा कैबिनेट से पास होकर हम सभी अतिथि शिक्षकों की बहाली उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की गुणात्मक, रचनात्मक सहित शैक्षणिक वातावरण में बदलाव हेतु की गई थी। जिसकी संख्या मात्र 4203 हैं, जो 38 जिला के विभिन्न उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं एवं जुलाई 2018 से लगातार,बिना किसी सेवा टूट के लगातार सेवा देते आ रहे हैं। शिक्षा विभाग सहित शिक्षा मंत्री भी यह मानते हैं कि अतिथि शिक्षक उच्च योग्यता धारी एवं उच्च अनुभवी शिक्षक हैं ।
अतिथि शिक्षकों के बदौलत ही इंटर परीक्षा परिणाम 2019 एवं 2020 में करीब 40% की बढ़ोतरी हुई। अतिथि शिक्षक की नियुक्ति में एक आम पॉइंट ऐड कर दिया गया था कि, अतिथि शिक्षकों का मानदेय प्रति कार्य दिवस ₹1000 देय होगा। जिसे विपत्र 25 पर भरकर देना होगा। इसमें एक और पॉइंट था, जिसके कारण अतिथि शिक्षक 2018 जुलाई से ही शोषण के शिकार होते रहे हैं,इसमें कहा गया था के विद्यालय प्रधानाचार्य अपने आवश्यकतानुसार अतिथि शिक्षकों से कार्य ले सकते हैं यही वह मुख्य कारण है की अतिथि शिक्षकों की स्थिति अपने विद्यालयों में दयनीय थी। हमेशा उन्हें बार-बार अतिथि अतिथि अतिथि कहकर मजाक उड़ाया जाता था। उन्हें सप्ताह में 2 दिन या काम नहीं हैं, कहकर घर वापस कर दिया जाता था। खैर धीरे धीरे शिक्षा विभाग को हम लोगों ने अवगत कराया तो उन्होंने इस पर एक्शन लिए और हमारे सम्मान के लिए कई बार पत्र जारी किए कि उन्हें कार्य लिया जाए।
राजन भारद्वाज आगे बताते हैं की 2018 से लेकर 2020 तक का सफ़र कांटो भरा था। हम लोगों ने कई ऐसे परेशानियां झेले हैं। खैर अब दिन बदल रहा है शिक्षा विभाग हमें भी अब शिक्षकों के समान उत्तम व्यवहार करते हैं एवं विद्यालय में भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं। हम लोगों की नियुक्ति तो केवल शैक्षणिक करने के लिए हुई थी लेकिन शिक्षा विभाग ने बहुत सारे ऐशे गैर शैक्षणिक कार्य लिए, जैसे कि चुनाव में P2,P1ऑफिसर का कार्य,कोरोना के समय में कोरेंटिन सेंटर पर कार्य आदि आदि।
अतिथि शिक्षकों ने मात्र डेढ़ साल कंप्लीट होने के बाद इंटर एवं मैट्रिक कॉपी का मूल्यांकन करने का भी गौरव हासिल किया। अतिथि शिक्षकों की इसी कर्मठता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने लॉकडाउन में विद्यालय के बंद रहने के बावजूद,उन्हें कैलेंडर अनुसार कार्यरत मानते हुए मानदेय देने की भी बात की। जिसके लिए शिक्षा विभाग के प्रति अतिथि शिक्षक सदा ऋणी रहेंगे।
अतिथि शिक्षकों ने भी अपने 25 महीने के कार्यकाल में लगभग 15 माह से अपने नियमितीकरण की बात विभिन्न माध्यमों से सरकार के पास पहुंचाते रहे हैं कई बार शिक्षा मंत्री कैबिनेट मंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अपने नियमितीकरण की गुहार लगाई है। हर बार उन्हें आश्वासन मिलता रहा है।अपर मुख्य सचिव श्री आरके महाजन एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल जी को भी आवेदन देकर अपने नियमितीकरण की बात सरकार तक पहुंचाने की बात कही है।महत्वकांक्षी कार्यक्रम नल जल हरियाली के दौरान खुद अतिथि शिक्षक एवं शिक्षिका ने अपने हाथों से मुख्यमंत्री महोदय को स्मृति चिन्ह ,फूल देकर अपने नियमितीकरण की बात कहे हैं,हर बार मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया और कहा कि "सब दिन ऐशे थोड़े ही रहिएगा, नियमित होइये न जाइयेगा।''
करोना महामारी में भी अतिथि शिक्षक-शिक्षिका ने अपने-अपने विधायक, मंत्री, सांसद सहित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अनुशंसा प्राप्त कर अपने नियमितीकरण की गुहार लगाई हैं। फिर उस अनुशंसा को विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी ,शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा विभाग को सौंपा है। हर जगह +2 अतिथि शिक्षकों को आश्वासन मिला हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपने में नियमितीकरण की मांग को सरकार तक पहुचाने का कार्य किए हैं। ट्विटर पर हजारों ट्वीट #अतिथिशिक्षकनियमितीकरणबिहार एवं #प्लस_टू_अतिथि_शिक्षक_नियमितीकरण_बिहार का किया जा चुका है। ट्विटर के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को मोतिहारी एवं मधेपुरा में नल जल हरियाली योजना कार्यक्रम के दौरान अतिथि शिक्षकों को दिए गए वादों को याद भी कराया गया है,हजारों ऐसे अतिथि शिक्षकों के ट्वीट हैं जिसमें वो लिखते हैं कि महोदय आपने कहा था कि "सब दिन अतिथि शिक्षक थोड़े ही रहिएगा,नियमित होइये न जाइएगा"। आप अपना वादा पूरा करें ,हमें नियमित करें।साथ ही आज के दिन अर्थात 15 अगस्त के दिन धोषणा करने की मांग की है।
अब बात आती है कि जब नियोजित शिक्षकों से नियोजित शब्द हटाकर सम्मानित किया जा रहा है तो अतिथि शिक्षकों को दिया हुआ वादा भी मुख्यमंत्री महोदय को पूरा करना चाहिए एवं उन्हें नियमितीकरण कर विभिन्न प्रकार की सुविधाएं देनी चाहिए। यह शिक्षकों सहित सम्पूर्ण बिहार के इतिहास में दर्ज हो जाएगा। राजन भारद्वाज आगे कहते हैं कि हमें माननीय मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास हैं,बिहार की शिक्षा विभाग में क़रीब पौने चार लाख शिक्षक, आगे डेढ़ लाख बहाली कर बिहार के शिक्षा में बदलाव कर रहे है, उसी प्रकार +2 अतिथि शिक्षकों से अतिथि शब्द हटाकर ,बिभिन्न प्रकार की सुविधा देकर सम्मान भी देंगे।

Bilkul thik khte hien
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